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स्वतंत्रता का अर्थ, परिभाषा और प्रकार , स्वतंत्रता की रक्षा या संरक्षण के उपाय।swatantrata ka arth evam paribhasha

स्वतंत्रता का अर्थ, परिभाषा और प्रकार , स्वतंत्रता की रक्षा या संरक्षण के उपाय।swatantrata ka arth evam paribhasha


 स्वतंत्रता का अर्थ, परिभाषा और प्रकार , स्वतंत्रता की रक्षा या संरक्षण के उपाय।swatantrata ka arth evam paribhasha


"Knowlege with Ishwar"


 स्वतंत्रता का अर्थः- 


स्वतंत्रता शब्द अंग्रजी भाषा के लिबर्टी शब्द का हिंदी रूपांतरण है। जो लेटिन भाषा से लिया गया है। लिबर का अर्थ होता है-’’बंधनो का अभाव’’ स्वतंत्रता का अर्थ प्रतिबंधों का अभाव ही नही होता है बल्कि सही रूप मे इसका अभिप्राय समाज में ऐसी परिस्थितियॉ उत्पन्न करना है है, जिसमें व्यक्ति की शक्ति, योग्यता तथा गुण पूर्णतः विकसित हो सकें और वह उन्मूक्त जीवन जी सके। स्वतंत्रता वास्तविक रूप में उतनी ही होनी चाहिए ,जिससे अन्य व्यक्तियों की स्वतंत्रता को बाधा न पहुॅचती हो।


"Knowlege with Ishwar"



स्वतंत्रता की परिभाषाः-


1. सीले के अनुसार- ’’स्वतंत्रता अतिशासन का विलोम है।’’


2. मैकेन्जी के अनुसार- ’’स्वतंत्रता सब प्रकार के प्रतिबंधों की अनुपस्थिति नहीं वरन् अनुचित के स्थान पर उचित प्रतिबंधों की व्यवस्था स्वतंत्रता है।’’


3. लास्की के अनुसार- ’’स्वतंत्रता आत्म- उपलब्धि का सकारात्मक और समान अवसर है।’’


4. जी. डी. एच. कोल के अनुसार- ’’बिना किसी बाधा के अपने व्यक्तित्व को पूर्णतया अभिव्यक्त करने की सुविधा स्वतंत्रता है।’’


5. टी. एच. ग्रीन के अनुसार- ’’स्वतंत्रता उन कार्यों को करने और उन सुखों को भोगने की सकारात्मक शक्ति है जो किये जाने और भोगे जाने योग्य है।’’


6. डॉ आशीर्वादम् के शब्दों में- ’’स्वतंत्रता इस बात की गारंटी और शर्त है कि मनुष्य को अपने कार्यों के संबंध ें आत्मनिर्णय का पूरा अधिकार है।’’


7. हरबर्ट स्पेंसर ने लिखा है कि- ’’स्वतंत्रता का अर्थ कार्य करने की स्वतंत्रता से है, जब तक वह किसी अन्य व्यक्ति की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप न करें।’’


8. बार्कर ने शब्दों में- ’’बंधनों का अभाव स्वतंत्रता नहीं है-स्वतंत्रता तो ऐसी परिस्थितियां हैं, जिनमें व्यक्ति का पूर्ण विकास हो सके।’’


9. महात्मा गांधी के अनुसार- ’’स्वतंत्रता का अर्थ प्रतिबंधों का अभाव नहीं, बल्कि व्यक्तित्व के विकास की अवस्थाओं की प्राप्ति है।’’


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स्वतंत्रता के प्रकारः-


1. प्राकृतिक स्वतंत्रताः- प्राकृतिक स्वतंत्रताएं वे स्वतंत्रताएं होती है जो मनुष्य को किसी राज्य के द्वारा प्राप्त न होकर प्रकृति से प्राप्त होती है। प्राकृतिक स्वतंत्रताओं के अंतर्गत मनुष्य को अपनी रक्षा तथा अपने विकास की आवश्यक परिस्थितियां प्राप्त करने की स्वतंत्रता प्राप्त होती है।


2. व्यक्तिगत स्वतंत्रताः- व्यक्तिगत स्वतंत्रताएं व्यक्ति के अपने व्यक्तिगत मामलो से संबंधित स्वतंत्रता होती है। व्यक्ति अपने इच्छानुसार कार्य कर सकता है। कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति के निजी मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है और न ही उस पर किसी कार्य को करने न करनें संबंधित दबाव बना सकता है।


3. राजनीतिक स्वतंत्रतांएः- राजनीतिक स्वतंत्रतांए संवैधानिक स्वतंत्रताएं होती है । व्यक्ति को अपनी सरकार चुनने का अधिकार होता है। राजनीतिक स्वतंत्रताओं के अंतर्गत व्यक्ति वोट देने, चुनाव लड़ने, संगठन व राजनीतिक दल बनानें, भाषण व प्रचार प्रसार करनें, अपनें विचारों को अभिव्यक्त करनें आदि के लिए स्वतंत्र होता है।


4.आर्थिक स्वतंत्रताः- आर्थिक स्वतंत्रता के अंतर्गत देश के प्रत्येक नागरिक को अपने न्युन्तम आवश्यकताओं की पूर्ति करनें और अपने परिवार का भरण-पोषण करनें के लिए धन कमानं की स्वतंत्रता है। राज्य के द्वारा अपने नागरिकों काम पाने, अवकाश का, न्युन्तम वेतन पाने का तथा बुढापे और बिमारी में आर्थिक सहायता पाने  आदि की स्वतंत्रता है।


5. सामाजिक स्वतंत्रताः- मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, उसे समाज की गतिविधीयों में भाग लेने की पूर्ण स्वतंत्रता है। इसके अतिरिक्त मनुष्य को समाज में वे सुविधांए भी प्राप्त होनी चाहिए जो उसके समाज में बने रहने के लिए आवश्यक है।


6. राष्ट्रीय स्वतंत्रताः-जब किसी देश में वहां के नागरिकों का ही शासन होता है तो इसे राष्ट्रीय स्वतंत्रता कहतें हैं। राष्ट्रीय स्वतंत्रता किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित न होकर राज्य की स्वतंत्रता से संबंधित होती है। इस स्वतंत्रता को प्राप्त करने के लिए ही कई सैनानियो ने अपने प्राणों की बलि दी थी। तिलक ने भी कहा है- स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहॅुगा।


7. धार्मिक स्वतंत्रता- धार्मिक स्वतंत्रता के अंतर्गत राज्य के प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी धर्म का अपनानें, अपने धर्म की उपासना करनें, अपने धार्मिक साहित्य की रक्षा करनें, अपने धर्म का प्रचार प्रसार करनें की स्वतंत्रता होती है। व्यक्ति या राज्य किसी भी व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।


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स्वतंत्रता की रक्षा के लिए आवश्यक उपायः-


1. आदर्श कानूनः- व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा राज्य के द्वारा की जाती है इसके लिए आवश्यक है कि राज्य एक आदर्श कानून लागू करें, जिससे व्यक्ति की स्वतंत्रताओं की रक्षा हो सके।


2. विशेषाधिकारों की समाप्तिः- यदि किसी व्यक्ति विशेष, जाति, धर्म या संपत्ति के आधार पर किसी व्यक्ति को विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, तो इससे अन्य लोगों की स्वतंत्रताआंें का हनन होता हैं। क्यांेकि विशेषाधिकार प्राप्त व्यक्ति धर्म अन्य लोगों की स्वतंत्रता पर आघात कर सकतें हैं। अतएव इसके लिए आवश्यक है कि विशेषाधिकारों की समाप्ति कर सभी को राज्य के द्वारा बिना किसी भेदभाव के समान माना जाये।


3. प्रजातंत्र का शासनः- राज्य में प्रजातांत्रिक शासन होना चाहिए। प्रजातंत्र के शासन में व्यक्ति की स्वतंत्रतांए सुरक्षित रहती है क्यांेकि यह शासन जनता का जनता के द्वारा और जनता के लिए होता है परंतु इसके लिए लोगों में न्यायप्रियता तथा सहनशीलता की भावना होनी चाहिए।


4.स्वतंत्र न्यायपालिकाः- नागरिको की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए राज्य में स्वतंत्र न्यायपालिका का होना भी आवश्यक है। न्यायालय स्वतंत्र हो तथा न्यायालय के कार्यों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप व दबाव नहीं होना चाहिए।


5. मौलिक अधिकारः- नागरिकों के मुल अधिकार या मौलिक अधिकार वे अधिकार हैं जो नागरिकों को संविधान के द्वारा प्राप्त होतंें हैं। जो हर परिस्थिति में व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करता हैं।


6. आर्थिक न्यायः- राज्य के द्वारा लोगों की न्युन्तम आवश्यकताओ जैसे भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे अनिवार्य सुविधाओं की पूर्ति हो जानी चाहिए। तथा राज्य के द्वारा आर्थिक विषमता को कम करनें के लिए लोक कल्याणकारी योजनाओं का निर्माण करना चाहिए।


7. प्रेस की स्वतंत्रताः- आधुनिक युग में लोकतंत्र का चौथा आथार स्तंभ प्रेस को माना जाता है। यदि समाचार पत्र स्वतंत्र है तो उसके द्वारा शासन प्रशासन को मर्यादित रखने का कार्य किया जा सकता है। इसके साथ ही लोगों को उनकी स्वतंत्रता के प्रति जागरूक किया जा सकता है।


8. स्थानीय शासन की व्यवस्थाः- नागरिकों को स्वंत्रता के प्रति प्रेम उत्पन्न करनें तथा उन्हें इस दिशा में जागरूक बनानें के लिए सत्ता का विकेन्द्रीकरण आवश्यक है। इससे व्यक्ति स्वतंत्रता के प्रति उत्साहित होगा।


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