न्याय nyay अर्थ परिभाषा, न्याय के प्रकार, न्याय के तत्वः-nyay ki paribhasha
"Knowledge with Ishwar"
न्याय का अर्थः-
न्याय से तात्पर्य उस परिस्थिति से है, जिसमें किसी व्यक्ति के विस्तृत हितों के साथ तालमेल स्थापित किया जा सके। किसी भी व्यक्ति का आचरण तभी न्यायपूर्ण माना जा सकता है। जब वह समाज और राज्य के प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।
दूसरें शब्दों में समाज के व्यापक कल्याण की सिद्धी ही न्याय हैं। जिसमें समाज की प्रगति व विकास निहित हो।
अतः न्याय के द्वारा किसी भी व्यक्ति पर किये गयेे अत्याचार व अपमान पर रोक लगाई जाती हैै तथा व्यक्ति के विकास का मार्ग प्रशस्त किया जाता है।
न्याय की परिभाषाः-
1. प्लेटो के अनुसार- ’’न्याय मानव आत्मा की उचित व्यवस्था और मानवीय स्वभाव की प्राकृतिक मॉग है।’’
2. आगस्टाइन के अनुसार- ’’न्याय एक व्यवस्थित एव अनुशासित जीवन व्यतीत करने तथा कर्तव्यों का पालन करनें से है, जिनकी व्यवस्था मॉग करती हैं।’’
3. थामस एक्वीनास के अनुसार- ’’प्रत्येक व्यक्ति को उसके अपने अधिकार देने की निश्चित और सनातन इच्छा न्याय है।’’
4. कौटिल्य के अनुसार- ’’यदि न्याय का प्रशासन उचित प्रकार से न किया जाए तो वानप्रस्थ ता क्या, संन्यासी कुपित हो उठते है, यहां तक की नमक भी अपना स्वाद छोड़ देता हैै।
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न्याय के विभिन्न प्रकार:-
1.नैतिक न्यायः- आज के युग में नैतिक न्याय को ही प्रधानता दी जा रही है। नैतिक न्याय से अर्थ उन नियमों से लिया जाता है। जो सभी जगह विद्यमान होतें हैं। सभी के द्वारा मान्य किये गये होते हैं। तथा जिन्हें बदला नहीं जा सकता हो। अतः इन नैतिक नियमो का पालन करना प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व होता हैं। इन नैतिक न्याय में सत्य बोलना, बडों का आदर करना, सभी के साथ सम्मानपूर्ण व्यवहार करना आदि है।
2.कानूनी न्यायः- कानूनी न्याय से तात्पर्य उस न्याय से है। जिसमें राज्य के द्वारा स्थापित कानून के द्वारा न्याय दिलाने की व्यवस्था की गई है। कानूनी न्याय वे न्याय हैं जिनका पालन करना प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनिवार्य है। कानूनी न्याय के तहत दोषी व्यक्ति को सजा दी जाती है तथा व्यथित व्यक्ति को न्याय दिया जाता है, तथा उसकी समस्याओं का निराकरण किया जाता है। कानूनी न्याय के तहत बिना किसी भेदभाव के समान रूप से न्याय प्रदान किया जाता है।
3.राजनीतिक न्यायः- राजनीतिक न्याय के तहत सभी व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के समान रूप से राजनीति में भाग ले सकतें हैं और राजनीतिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकतें है। राजनीतिक न्याय के द्वारा व्यक्ति को मत देने का अधिकार, राजनीतिक दल बनानें, चुनाव लड़नें, कोई भी सभा व मंच आदि करनें अपने विचार प्रकट करनें का अधिकार दिया जाता हैं।
4. सामाजिक न्यायः- सामाजिक न्याय का अर्थ यह है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने विकास के समान अवसर प्राप्त होने चाहिए। सामाजिक स्थिति या जातिगत आधार पर किसी भी व्यक्ति के साथ कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। सामाजिक न्याय के द्वारा शोषित व्यक्तियों का संरक्षण किया जाता है। सामाजिक न्याय के द्वारा उन लोगों का विकास किया जाता है जो आधुनिक विकास की दौड में पीछे छुट गये थे।
5. आर्थिक न्यायः- आर्थिक न्याय के द्वारा प्रत्येक व्यक्ति को वे दशांए उपलब्ध कराई जाती है। जिसके द्वारा वह अपने जीवन निर्वाह की न्युन्तम आवश्यकताओं की पूर्ति कर सके। दूसरे शब्दों में व्यक्तियों में संपत्ति का अंतरण इतना अधिक नहीं होना चाहिए। जिससें की एक वर्ग दूसरे वर्ग पर शोषण करना प्रारम्भ कर दे। सभी न्याय में आर्थीक न्याय सबसे महत्वपूर्ण न्याय होता है।
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न्याय के तत्वः-
1. सत्य
2. मूल्यों के आधारभूत क्रम की सामान्यता
3. कानून के समक्ष समानता
4. स्वतंत्रता
5. प्रकृति की अनिवार्यताओं के प्रति सम्मान

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