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मानव अधिकार किसे कहतें हैं? मानव अधिकार की परिभाषा, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का कार्यकाल व संरचना, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कार्य और शक्तियॉ।

मानव अधिकार किसे कहतें हैं? मानव अधिकार की परिभाषा, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का कार्यकाल व संरचना, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कार्य और शक्तियॉ।


 मानव अधिकार किसे कहतें हैं? मानव अधिकार की परिभाषा, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का कार्यकाल व संरचना, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कार्य और शक्तियॉ।


"Knowledge with Ishwar"


मानव अधिकार का अर्थः-


मानव अधिकारों का अर्थ उन प्राकृतिक अधिकारों से है जिनके अभाव में मनुष्य के लिये जीवन निर्वाह कठिन होता है। इसके साथ ही वे सब अधिकार जो मनुष्य को सक्षम एवं समृद्ध बनाते है। मानव अधिकार कहलाते है। मानव अधिकार के अंतर्गत व्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता, सामाजिक न्याय आदि प्राप्त होते है।


दूसरे शब्दों में- मानव अधिकार जन्मजात होते हैं। जो जीवन के अभिन्न अंग होते हैं । यह अधिकार मानव के विकास के लिए आधारभूत होते हैं। मानव अधिकार को प्रत्येक राज्य द्वारा अपने संविधान में मानव की प्राथमिक आवश्यताओं और मॉगों के रूप में सम्मिलित किया जाना चाहिए।


संक्षेप में- मानव अधिकार मानव के अस्तित्व और उसक विकास व सम्मान के लिए आवश्यक अधिकार है, जिनकी अवेहलना नहीं की जानी चाहिए।


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मानव अधिकार की परिभाषाः-


1. लोगों को उनकें मानव अधिकारों से वंचित करना उनकी मानवता को चुनौती देना है।


2. आर.जे. विसेट के शब्दों में- ’’मानव अधिकार वे अधिकार हैै जो प्रत्येक व्यक्ति को मानव होने के कारण प्राप्त हैै। इन अधिकारों का आधार मानव स्वभाव में निहित है।’’


इस प्रकार यदि किसी व्यक्ति के साथ भाषा, जाति, रंग, रूप, लिंग, क्षेत्रवाद आदि के आधार पर भेदभाव किया जाता है तो वह मानव अधिकार के हनन के अंतर्गत आता है।


मानव अधिकारों का सार्वभौमिक घोषणा पत्रः- संयुक्त राष्ट्र ने अपन उत्तरदायित्वों और जिम्मेदारियों को पुरा करन के लिए अपनी एक इकाई को आर्थिक और सामाजिक परिषद् को यह जिम्मेदारी सौंपी कि वह मानव अधिकारों की सुरक्षा हेतु कोई योजना प्रस्तुत करें वह उसका प्रारूप बनायें। परिषद् द्वारा फरवरी, 1946 में एक मानव अधिकार आयोग कमीशन की स्थापना की गई। इसे मानव अधिकारों के अंतर्राष्ट्रीय घोषणा-पत्र का प्रारूप तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई । जिसका अध्यक्ष श्रीमती एलोनोर रूजवेल्ट को बनाया गया।  लगभग तीन वर्षें की कठीन मेहनत के बाद आयोग ने मानव अधिकारों से संबंधित प्रारूप तैयार किया व इसे संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने कुछ संशोधनों के साथ 10 दिसंबर 1946 को सर्व सम्मति  के साथ स्वीकार कर लिया, इसे ही मानवाधिकारों का सार्वभौमिक घोषणा पत्र कहते हैं। इसीलिए 10 दिसंबर को प्रति वर्ष मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है।


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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना व संरचनाः‘-राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एक सरकारी संस्था है जिसकी स्थापना 12 अक्टुम्बर 1993 को की गई। यह एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था होती है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। इसके प्रथम अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री रंगनाथ मिश्र तथा वर्तमान में न्यायमूर्ति अरूण कुमार मिश्र इसेक वर्तमान पद पर आसीन है। मानव अधिकार आयोग में एक अध्यक्ष व अन्य सात सदस्य होते है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग केें सात सदस्यों में से तीन पदेन सदस्य होते हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एक उच्चाधिकार प्राप्त समिती  की सिफारिश पर की जाती है। इन सदस्यों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधिश होते हैं, अन्य सदस्यों मे उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधिश, मानव अधिकार आयोग के मामालों में अनुुभवी दो व्यक्ति, व पदेन सदस्यों में राष्ट्रीय आयोग- महिला एवं बाल विकास आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य इसके सदस्य होते हैं। इन सदस्यों का कार्यकाल 3 वर्ष का होता है।


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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की शक्तियॉ और कार्यः-


1. मानव अधिकार के उल्लंघन से संबंधित ऐसा कोई मामला जो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संज्ञान (जानकारी) में आता है तो आयोग को उस मामलें में जॉंच का अधिकार होता है।फ


2. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ऐसे किसी भी मानव के अधिकार से संबंधित न्यायिक मामलें मे हस्तक्षेप कर सकता है, अतः इसे न्यायिक मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार प्राप्त है।


3. आयोग किसी भी जेल का दौरा कर सकता है और जेल में बंद केदियों की स्थिति का निरिक्षण कर सकता है। तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सुझाव भी दे सकता  है।


4. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग संविधान या किसी अन्य कानून द्वारा मानवाधिकारों को बचाने के लिए प्रदान किये गये सुरक्षा उपायों की समीक्षा कर सकता है तथा सुरक्षा के उपायों में बदलाव की भी मॉग कर सकता हैं।


5. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानव अधिकार स संबंधित अनुसंधान का कार्य भी कर सकता है।


6. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग प्रचार प्रसार के साधनों तथा सोशल मिडीया जैसे प्रकाशन, मीडीया, सेमीनार और अन्य माध्यमों से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच  मानवाधिकारों से जुडी  जानकारी का प्रचार प्रसार कर नागरिकों को जागरूक करने का प्रयास करता है।


7. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पास दीवानी शक्तियॉ भी है और ये अंतरिम राहत की सुविधा भी प्रदान कर सकता है।


8. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पास मुआवजे व हर्जाने के भुगतान व राहत राशि की सिफारिश करने की भी अधिकार प्राप्त है।


9. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इसके पास प्रतिवर्ष बडी संख्या में शिकायतें एवं मानव के अधिकारों के हनन से संबंधित मामलें दर्ज होते हैं।


10 राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग केंद्र तथा राज्य सरकारों से मानव अधिकारों में उल्लंधन को रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठानें की सिफारिश भी कर सकता है।


11. आयोग प्रतिवर्ष अपनी रिपोर्ट या प्रतिवेदन राष्ट्रपति को सौंपता है या प्रस्तुत करता है जिसे दोनों सदनों में प्रस्तुत किया जाता है।


 मानव अधिकार किसे कहतें हैं? मानव अधिकार की परिभाषा, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का कार्यकाल व संरचना, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कार्य और शक्तियॉ।


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